बजट 2026: ममता का 'जनकल्याण' वि. बीजेपी का 'कामिक्ज़े' आरोप

बजट 2026: ममता का 'जनकल्याण' वि. बीजेपी का 'कामिक्ज़े' आरोप

5 फरवरी 2026 को कोलकाता में पेश किए गए पश्चिम बंगाल के ₹4.06 लाख करोड़ के बजट ने राज्य की राजनीति को एक बार फिर दो ध्रुवों में बांट दिया। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे 'जनता-केंद्रित' और केंद्र की उपेक्षा के बावजूद आगे बढ़ने का प्रतीक बताया, जबकि विपक्ष ने इसे अर्थव्यवस्था के लिए 'कामिक्ज़े' (आत्मघाती) घोषित कर दिया। यह बजट सिर्फ़ संख्याओं का खेल नहीं था; यह 2026 के चुनावी माहौल और केंद्र-राज्य संबंधों की तनावपूर्ण स्थिति का स्पष्ट परिणाम था।

सच्चाई यह है कि इस बजट को लेकर राजनीतिक रैली जैसा माहौल बना हुआ था। एक ओर त्रिनामूल कांग्रेस ने दावा किया कि वे गरीबों और महिलाओं के लिए राहत पैकेज लाए हैं, तो दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने बजट की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए। लेकिन सबसे बड़ा ट्विस्ट तब आया जब ममता बनर्जी ने केंद्रीय बजट पर भी हमला बोलते हुए कहा कि उसमें बंगाल के लिए 'कुछ नहीं है'।

केंद्र पर 'उपेक्षा' का आरोप और राज्य का उत्तरदायित्व

ममता बनर्जी ने अपने बजट भाषण के दौरान सीधे केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, "केंद्र की कथित आर्थिक उपेक्षा के बावजूद जनता-केंद्रित बजट लेकर आई सरकार।" यह बयान सिर्फ़ एक राजनीतिक स्लोगन नहीं था; यह 1 फरवरी 2026 को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए केंद्रीय बजट के खिलाफ़ उनकी लगातार चलाई गई अभियान का हिस्सा था।

ममता ने केंद्रीय बजट को 'दिशाहीन' और 'दूरदर्शनहीन' कहकर ठुकरा दिया। उनका तर्क था कि केंद्र बंगाल से पैसे ले रहा है, लेकिन बदले में 'एक पैसा भी नहीं दे रहा है।' उन्होंने केंद्र द्वारा घोषित आर्थिक कॉरिडोर को झूठा दावा बताते हुए कहा कि बंगाल अपनी मेहनत से विकास कर रहा है। इस मुद्दे को लेकर टीवी डिबेट्स में वे इतनी उत्तेजित हो गईं कि उन्होंने स्थिति को बांग्लादेश से तुलना तक कर दी, जो दर्शाता था कि तनाव कितना ऊंचा था।

बजट के मुख्य पहलू: महिलाओं और गरीबों के लिए राहत

वित्त मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य द्वारा पेश किए गए इस बजट का मुख्य फोकस सामाजिक सुरक्षा पर था। सरकार ने इसे 'अकाउंट्स का स्टेटमेंट' नहीं, बल्कि 'परिवर्तन और औद्योगिक पुनरुत्थान' का दस्तावेज़ कहा। हालाँकि, जमीनी हकीकत में सबसे ज्यादा चर्चा इन बातों पर हुई:

  • महिलाओं के लिए वृद्धि: महिलाओं को मिलने वाली मासिक आर्थिक सहायता में वृद्धि की गई, जिसे सरकार ने अपनी 'जनता-केंद्रित' नीति का सबसे बड़ा सबूत बताया।
  • गरीबी उन्मूलन योजनाएं: समाज के कमजोर वर्गों के लिए सीधे वित्तीय समर्थन और सामाजिक कल्याण योजनाओं का विस्तार किया गया।
  • औद्योगिक विकास: आधिकारिक भाषण में औद्योगिक प्रगति पर जोर दिया गया, लेकिन विपक्ष का कहना था कि इसके लिए पर्याप्त निवेश नहीं दिखा।

सरकार का मानना था कि ये कदम उस आर्थिक मंदी को रोकेंगे जिसका शिकार बंगाल पिछले कुछ वर्षों से था।

विपक्ष का हमला: 'कामिक्ज़े' बजट या विकास की दिशा?

विपक्ष का हमला: 'कामिक्ज़े' बजट या विकास की दिशा?

विपक्ष ने इस बजट को लेकर कोई रियायत नहीं दिखाई। राजू बिस्टा, एक प्रमुख बीजेपी नेता, ने इसे 'कामिक्ज़े बजट' नाम दिया। उनका कहना था कि यह बजट राज्य की अर्थव्यवस्था के आत्मघाती मिशन को तेज करने के लिए बनाया गया है, न कि लंबी अवधि के विकास के लिए।

बीजेपी नेता पामेला गोस्वामी ने बजट की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए विशिष्ट आंकड़े दिए। उन्होंने बताया कि सूचना प्रौद्योगिकी (IT) क्षेत्र को मात्र ₹217 करोड़ और विज्ञान एवं अनुसंधान को ₹82 करोड़ आवंटित किए गए। उनके अनुसार, यह राशि आज के डिजिटल युग में बिल्कुल भी पर्याप्त नहीं है और यह दर्शाता है कि ममता बनर्जी सरकार तकनीकी विकास को प्राथमिकता नहीं दे रही है।

"पश्चिम बंगाल बजट ममता बनर्जी के अधीन प्राथमिकताओं की एक निंदनीय कहानी बताता है। IT और विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को इतनी कम राशि देना विकास के प्रति असंवेदनशीलता है।" — पामेला गोस्वामी

जून 2026: सरकार बदलने के बाद बजट में बदलाव

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। 2026 के मध्य में, जब पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन हुआ और सुवेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में बीजेपी सरकार बनी, तो बजट की दिशा पूरी तरह बदल गई। जून 2026 में पेश किए गए नए बजट ने पिछली सरकार की कई नीतियों को उलट दिया।

नई सरकार ने मदरसों के बजट में 62 प्रतिशत की भारी कटौती की, जो ममता बनर्जी सरकार के समय में एक प्रमुख लाभार्थी वर्ग था। इसके विपरीत, 'बंगाल विकास' विभाग के बजट को दोगुना कर दिया गया। यह कदम नई सरकार के 'कल्याण, सांस्कृतिक संरक्षण और राष्ट्रवादी प्राथमिकताओं' पर केंद्रित होने का संकेत था। यह बदलाव सिर्फ़ आर्थिक नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश भी था—कि अब विकास की परिभाषा बदल चुकी है।

चुनावी राजनीति और केंद्र-राज्य संघर्ष

चुनावी राजनीति और केंद्र-राज्य संघर्ष

2026 के बजट चक्र ने यह साबित कर दिया कि वित्त अब सिर्फ़ अर्थशास्त्र नहीं, बल्कि एक शक्तिशाली राजनीतिक हथियार बन चुका है। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (NDA) की रणनीति में बिहार के बाद अब बंगाल को केंद्र में रखने का संकेत मिला। क्या केंद्र द्वारा राशि जारी करना या रोकना बंगाल के मतदाताओं के मन बदल सकता है? यह प्रश्न अभी भी खुला है।

ममता बनर्जी ने अपना बजट 'जनता-केंद्रित' बताया, लेकिन विपक्ष और बाद की घटनाओं ने इसे 'चुनावी भेंट' के रूप में प्रस्तुत किया। अंततः, 2026 का बजट वह बिंदु था जहां पश्चिम बंगाल की राजनीति ने एक नया मोड़ लिया, जिसके प्रभाव आज भी महसूस किए जा रहे हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

पश्चिम बंगाल बजट 2026-27 की कुल राशि कितनी थी?

5 फरवरी 2026 को पेश किए गए पश्चिम बंगाल के वित्त वर्ष 2026-27 के बजट की कुल राशि ₹4.06 लाख करोड़ थी। इस बजट में सामाजिक सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण और औद्योगिक विकास पर जोर दिया गया था।

ममता बनर्जी ने केंद्रीय बजट 2026-27 पर क्या आपत्ति जताई?

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्रीय बजट को 'दिशाहीन' और 'दूरदर्शनहीन' कहा। उनका आरोप था कि केंद्र सरकार बंगाल की आर्थिक उपेक्षा कर रही है और बजट में राज्य के लिए कोई विशेष प्रावधान या निवेश शामिल नहीं है।

विपक्ष ने बजट को 'कामिक्ज़े' क्यों कहा?

बीजेपी नेता राजू बिस्टा ने बजट को 'कामिक्ज़े' इसलिए कहा क्योंकि उनका मानना था कि यह बजट राज्य की अर्थव्यवस्था को लंबी अवधि में नुकसान पहुंचाएगा। उन्होंने IT और विज्ञान क्षेत्रों में कम आवंटन को विकास के प्रति असंवेदनशीलता का सबूत माना।

सुवेंदु अधिकारी की सरकार ने बजट में क्या बदलाव किए?

जून 2026 में सत्ता हासिल करने के बाद सुवेंदु अधिकारी की सरकार ने मदरसों के बजट में 62 प्रतिशत की कटौती की और बंगाल विकास विभाग के बजट को दोगुना कर दिया। यह कदम नई सरकार के विकास और राष्ट्रवादी एजेंडे को दर्शाता था।

बजट 2026 में IT और विज्ञान क्षेत्र को कितनी राशि मिली?

ममता बनर्जी सरकार के 2026-27 बजट में सूचना प्रौद्योगिकी (IT) क्षेत्र को ₹217 करोड़ और विज्ञान एवं अनुसंधान क्षेत्र को ₹82 करोड़ आवंटित किए गए थे, जिन्हें विपक्ष ने अपर्याप्त बताया।

द्वारा लिखित Sudeep Soni

मैं एक वरिष्ठ पत्रकार हूं और मैंने अलग-अलग मीडिया संस्थानों में काम किया है। मैं मुख्य रूप से समाचार क्षेत्र में सक्रिय हूँ, जहाँ मैं दैनिक समाचारों पर लेख लिखने का काम करता हूं। मैं समाज के लिए महत्वपूर्ण घटनाओं की रिपोर्टिंग करता हूं और निष्पक्ष सूचना प्रदान करने में यकीन रखता हूं।

बजट 2026: ममता का 'जनकल्याण' वि. बीजेपी का 'कामिक्ज़े' आरोप

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निवास पर आरजी कर अस्पताल विवाद सुलझाने के लिए डॉक्टर्स से मुलाकात

दरजीली पहाड़ियों में भारी बारिश से बवंडर, 23 मौतें, 1000 से अधिक पर्यटक फंसे